NCERT Solutions कक्षा 10 गणित अध्याय 1 — वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) हिंदी में
कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएँ हर छात्र के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं, और गणित उनमें से सबसे चुनौतीपूर्ण विषयों में से एक है। इस परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए, NCERT की पाठ्यपुस्तकों को गहराई से समझना और उनके हर प्रश्न का अभ्यास करना बेहद ज़रूरी है। आज हम कक्षा 10 गणित के पहले अध्याय "वास्तविक संख्याएँ" (Real Numbers) पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसके संपूर्ण समाधान आपको TopperApp पर भी मिलेंगे। यह अध्याय न केवल आपके गणितीय आधार को मजबूत करता है, बल्कि आगे की कक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है।
परिचय: वास्तविक संख्याएँ (Introduction: Real Numbers)
गणित की दुनिया में संख्याओं का एक विशाल परिवार है, और वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) इस परिवार का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कक्षा 9 में आपने परिमेय (Rational) और अपरिमेय (Irrational) संख्याओं के बारे में पढ़ा था। कक्षा 10 में, हम इन अवधारणाओं को और आगे बढ़ाएंगे, कुछ नए और दिलचस्प गुणों का पता लगाएंगे। यह अध्याय आपको संख्याओं के बीच के संबंधों को समझने में मदद करेगा, जैसे कि यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid's Division Lemma) और अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)। राजस्थान बोर्ड (RBSE) के छात्रों के लिए यह अध्याय बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका (Euclid's Division Lemma)
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका एक fundamental concept है जो दो धनात्मक पूर्णांकों (positive integers) के बीच के संबंध को बताता है। यह प्रमेयिका कहती है कि दो दिए गए धनात्मक पूर्णांकों 'a' और 'b' के लिए, अद्वितीय पूर्ण संख्याएँ (unique whole numbers) 'q' और 'r' इस प्रकार विद्यमान हैं कि:
`a = bq + r`, जहाँ `0 ≤ r < b`
यहाँ:
- `a` भाज्य (dividend) है।
- `b` भाजक (divisor) है।
- `q` भागफल (quotient) है।
- `r` शेषफल (remainder) है।
सरल शब्दों में, जब हम किसी संख्या 'a' को किसी अन्य संख्या 'b' से भाग देते हैं, तो हमें एक भागफल 'q' और एक शेषफल 'r' मिलता है। शेषफल 'r' हमेशा भाजक 'b' से छोटा होता है और शून्य या शून्य से बड़ा होता है। इस प्रमेयिका का उपयोग मुख्य रूप से दो धनात्मक पूर्णांकों का महत्तम समापवर्तक (HCF - Highest Common Factor) ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम (Euclid's Division Algorithm)
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम, यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका पर आधारित एक प्रक्रिया है जिसका उपयोग दो धनात्मक पूर्णांकों का HCF ज्ञात करने के लिए किया जाता है। यह एक step-by-step method है जो तब तक दोहराया जाता है जब तक शेषफल शून्य न हो जाए।
एल्गोरिथम के चरण:
- दो धनात्मक पूर्णांक 'c' और 'd' लें, जहाँ `c > d` है।
- यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका लागू करें: `c = dq + r`, जहाँ `0 ≤ r < d`।
- यदि `r = 0` है, तो 'd' ही 'c' और 'd' का HCF है।
- यदि `r ≠ 0` है, तो भाजक 'd' और शेषफल 'r' पर फिर से यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका लागू करें।
- इस प्रक्रिया को तब तक दोहराते रहें जब तक शेषफल शून्य न हो जाए। इस स्थिति में, जिस भाजक से शेषफल शून्य प्राप्त होता है, वही HCF होता है।
- चूंकि `225 > 135`, हम 225 और 135 पर यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका लागू करते हैं:
- अब, भाजक 135 और शेषफल 90 पर प्रमेयिका लागू करें:
- फिर, भाजक 90 और शेषफल 45 पर प्रमेयिका लागू करें:
- **प्रश्न 1:** निम्नलिखित संख्याओं का HCF ज्ञात करने के लिए यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम का प्रयोग कीजिए:
- (i) 135 और 225
- (ii) 196 और 38220
- (iii) 867 और 255
- **प्रश्न 2:** दर्शाइए कि कोई भी धनात्मक विषम पूर्णांक `6q + 1`, `6q + 3` या `6q + 5` के रूप का होता है, जहाँ `q` कोई पूर्णांक है।
- **हल:**
- मान लीजिए 'a' कोई धनात्मक विषम पूर्णांक है।
- हम `b = 6` लेते हैं।
- यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम द्वारा, `a = 6q + r`, जहाँ `0 ≤ r < 6`।
- संभावित शेषफल `r` हैं: 0, 1, 2, 3, 4, 5।
- इसलिए, 'a' `6q`, `6q + 1`, `6q + 2`, `6q + 3`, `6q + 4`, `6q + 5` के रूप का हो सकता है।
- चूंकि 'a' एक विषम पूर्णांक है, यह `6q`, `6q + 2`, `6q + 4` के रूप का नहीं हो सकता (क्योंकि ये सभी 2 से विभाज्य हैं, अतः सम हैं)।
- अतः, कोई भी धनात्मक विषम पूर्णांक `6q + 1`, `6q + 3` या `6q + 5` के रूप का होता है।
- `12 = 2 × 2 × 3` या `2^2 × 3`
- `30 = 2 × 3 × 5`
- `100 = 2 × 2 × 5 × 5` या `2^2 × 5^2`
- अभाज्य गुणनखंड करें:
- **HCF:** उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड केवल 2 है, और इसकी सबसे छोटी घात `2^1` है।
- **LCM:** सभी अभाज्य गुणनखंडों (2, 3, 5) की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल:
- **प्रश्न 1:** निम्नलिखित संख्याओं को अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में व्यक्त कीजिए:
- (i) 140
- (ii) 156
- (iii) 3825
- (iv) 5005
- (v) 7429
- **प्रश्न 2:** पूर्णांकों के निम्नलिखित युग्मों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए तथा इसकी जाँच कीजिए कि दो संख्याओं का गुणनफल = HCF × LCM है।
- (i) 26 और 91
- (ii) 510 और 92
- (iii) 336 और 54
- **प्रश्न 3:** अभाज्य गुणनखंड विधि द्वारा निम्नलिखित पूर्णांकों के HCF और LCM ज्ञात कीजिए।
- (i) 12, 15 और 21
- (ii) 17, 23 और 29
- (iii) 8, 9 और 25
- **अभाज्य गुणनखंड:**
- **HCF:** उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड 13 है, सबसे छोटी घात `13^1`।
- **LCM:** सभी अभाज्य गुणनखंडों (2, 7, 13) की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल।
- **जाँच:**
- **मान लें कि `√2` एक परिमेय संख्या है।**
- **दोनों पक्षों का वर्ग करें:**
- **निष्कर्ष:** समीकरण 1 से पता चलता है कि `a^2`, 2 से विभाज्य है।
- **`a` को `2c` के रूप में लिखें:**
- **`a` का मान समीकरण 1 में प्रतिस्थापित करें:**
- **निष्कर्ष:** `b^2 = 2c^2` से पता चलता है कि `b^2`, 2 से विभाज्य है।
- **विरोधाभास:** हमने पाया कि `a` और `b` दोनों 2 से विभाज्य हैं।
- **निष्कर्ष:** हमारा प्रारंभिक अनुमान कि `√2` एक परिमेय संख्या है, गलत था।
- **प्रश्न 1:** सिद्ध कीजिए कि `√5` एक अपरिमेय संख्या है।
- **प्रश्न 2:** सिद्ध कीजिए कि `3 + 2√5` एक अपरिमेय संख्या है।
- **हल (संक्षेप में):**
- मान लें कि `3 + 2√5` एक परिमेय संख्या है।
- तो, `3 + 2√5 = a/b` (जहाँ `a, b` सह-अभाज्य पूर्णांक, `b ≠ 0`)।
- `2√5 = a/b - 3`
- `2√5 = (a - 3b) / b`
- `√5 = (a - 3b) / 2b`
- चूंकि `a` और `b` पूर्णांक हैं, `(a - 3b) / 2b` एक परिमेय संख्या होगी।
- इसका अर्थ है कि `√5` एक परिमेय संख्या है।
- लेकिन हम जानते हैं कि `√5` एक अपरिमेय संख्या है।
- यह एक विरोधाभास है।
- अतः, हमारी प्रारंभिक धारणा गलत थी, और `3 + 2√5` एक अपरिमेय संख्या है।
- **प्रश्न 3:** सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित संख्याएँ अपरिमेय हैं:
- (i) `1/√2`
- (ii) `7√5`
- (iii) `6 + √2`
- यदि किसी परिमेय संख्या `p/q` के हर (denominator) `q` के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 या केवल 5 या दोनों (2 और 5) आते हैं, तो उसका दशमलव प्रसार सांत होगा।
- यदि हर `q` के अभाज्य गुणनखंड में 2 और 5 के अलावा कोई अन्य अभाज्य संख्या (जैसे 3, 7, 11 आदि) आती है, तो उसका दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होगा।
- `3/8`: हर `8 = 2^3`। गुणनखंड में केवल 2 है, अतः दशमलव प्रसार सांत है। (`3/8 = 0.375`)
- `13/125`: हर `125 = 5^3`। गुणनखंड में केवल 5 है, अतः दशमलव प्रसार सांत है। (`13/125 = 0.104`)
- `17/30`: हर `30 = 2 × 3 × 5`। गुणनखंड में 3 भी है, अतः दशमलव प्रसार असांत आवर्ती है। (`17/30 = 0.5666...`)
- **प्रश्न 1:** बिना लंबी विभाजन प्रक्रिया किए बताइए कि निम्नलिखित परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार सांत हैं या असांत आवर्ती हैं:
- (i) `13/3125`
- (ii) `17/8`
- (iii) `64/455`
- (iv) `15/1600`
- (v) `29/343`
- (vi) `23 / (2^3 × 5^2)`
- (vii) `129 / (2^2 × 5^7 × 7^5)`
- (viii) `6/15`
- (ix) `35/50`
- (x) `77/210`
- हर `q = 3125` के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- चूंकि हर का अभाज्य गुणनखंड `5^5` के रूप का है (जो `2^n 5^m` के रूप का है, जहाँ `n=0, m=5`), अतः इसका दशमलव प्रसार सांत है।
- हर `q = 455` के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- चूंकि हर का अभाज्य गुणनखंड `5 × 7 × 13` के रूप का है (इसमें 5 के अलावा 7 और 13 भी हैं), अतः इसका दशमलव प्रसार असांत आवर्ती है।
- **प्रश्न 2:** ऊपर दिए गए प्रश्न 1 में उन परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसारों को लिखिए जो सांत हैं।
- यह प्रश्न आपको उन संख्याओं के दशमलव प्रसार लिखने के लिए कहता है जिनका आपने प्रश्न 1 में सांत पाया है। आप हर को `10` की घात में बदलकर यह कर सकते हैं।
- **उदाहरण (17/8):**
- **प्रश्न 3:** कुछ वास्तविक संख्याओं के दशमलव प्रसार नीचे दर्शाए गए हैं। प्रत्येक स्थिति के लिए निर्धारित कीजिए कि यह संख्या परिमेय है या नहीं। यदि यह परिमेय है और `p/q` के रूप की है, तो `q` के अभाज्य गुणनखंडों के बारे में आप क्या कह सकते हैं?
- (i) `43.123456789` (सांत दशमलव प्रसार, अतः परिमेय। `q` का गुणनखंड `2^n 5^m` के रूप का होगा।)
- (ii) `0.120120012000120000...` (असांत अनावर्ती, अतः अपरिमेय।)
- (iii) `43.123456789` (बार लगा हुआ, असांत आवर्ती, अतः परिमेय। `q` का गुणनखंड `2^n 5^m` के रूप का नहीं होगा, इसमें 2 और 5 के अलावा अन्य अभाज्य गुणनखंड भी होंगे।)
- **NCERT पर फोकस:** RBSE का पाठ्यक्रम NCERT पर आधारित है, इसलिए NCERT की पाठ्यपुस्तक को अपनी बाइबिल मानें। हर उदाहरण और प्रश्नावली के प्रश्न को हल करें।
- **पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र:** पिछले 5-7 वर्षों के RBSE बोर्ड के प्रश्न पत्रों को हल करें। इससे आपको परीक्षा पैटर्न, महत्वपूर्ण प्रश्नों के प्रकार और समय प्रबंधन का अंदाजा होगा।
- **अवधारणाओं को समझें:** केवल रटने के बजाय, हर अवधारणा (जैसे यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय) को गहराई से समझें। गणित में 'क्यों' जानना 'क्या' जानने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
- **नियमित अभ्यास:** गणित अभ्यास का विषय है। हर दिन कम से कम 1-2 घंटे गणित का अभ्यास करें।
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HCF ज्ञात करना (Finding HCF)
आइए एक उदाहरण से समझते हैं कि यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम का उपयोग करके HCF कैसे ज्ञात करते हैं।
उदाहरण: 135 और 225 का HCF ज्ञात करें।
`225 = 135 × 1 + 90` (यहाँ `r = 90 ≠ 0`)
`135 = 90 × 1 + 45` (यहाँ `r = 45 ≠ 0`)
`90 = 45 × 2 + 0` (यहाँ `r = 0`)
चूंकि शेषफल शून्य आ गया है, और इस चरण में भाजक 45 है, अतः 135 और 225 का HCF 45 है। यह विधि बहुत प्रभावी है और बड़े numbers के लिए भी काम करती है।
प्रश्नावली 1.1 के महत्वपूर्ण प्रश्न:
(इन सभी प्रश्नों के विस्तृत समाधान आपको TopperApp पर मिल जाएंगे।)
यह प्रश्न conceptual understanding के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है। Nidhi AI doubt solver का उपयोग करके आप ऐसे किसी भी प्रश्न में अपनी शंकाओं को तुरंत दूर कर सकते हैं।
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)
यह प्रमेय गणित की सबसे सुंदर और शक्तिशाली प्रमेयों में से एक है। यह कहती है कि "प्रत्येक भाज्य संख्या (composite number) को अभाज्य संख्याओं (prime numbers) के गुणनफल के रूप में अद्वितीय रूप से व्यक्त किया जा सकता है, और यह गुणनखंडन (factorization) अभाज्य गुणनखंडों के क्रम के बिना अद्वितीय होता है।"
सरल शब्दों में, कोई भी भाज्य संख्या (जैसे 4, 6, 8, 9, 10, 12...) को केवल अभाज्य संख्याओं (जैसे 2, 3, 5, 7, 11...) के गुणा के रूप में लिखा जा सकता है, और यह तरीका हमेशा एक ही होता है, भले ही आप अभाज्य संख्याओं का क्रम बदल दें।
उदाहरण:
यह प्रमेय HCF और LCM (Lowest Common Multiple - लघुत्तम समापवर्त्य) ज्ञात करने के लिए एक आधार प्रदान करती है।
अभाज्य गुणनखंड विधि (Prime Factorization Method)
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय का उपयोग करके हम किसी भी संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात कर सकते हैं। यह विधि HCF और LCM ज्ञात करने में बहुत उपयोगी है।
उदाहरण: 140 के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
`140 = 2 × 70`
`= 2 × 2 × 35`
`= 2 × 2 × 5 × 7`
अतः, `140 = 2^2 × 5 × 7`
HCF और LCM ज्ञात करना (Finding HCF and LCM)
अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग करके HCF और LCM ज्ञात करना बहुत सीधा है।
HCF (महत्तम समापवर्तक): दी गई संख्याओं में प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड (common prime factor) की सबसे छोटी घात (lowest power) का गुणनफल।
LCM (लघुत्तम समापवर्त्य): दी गई संख्याओं में संबंधित प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड (prime factor) की सबसे बड़ी घात (highest power) का गुणनफल।
उदाहरण: 6 और 20 का HCF और LCM ज्ञात करें।
`6 = 2 × 3`
`20 = 2 × 2 × 5 = 2^2 × 5`
अतः, `HCF(6, 20) = 2`
`2` की सबसे बड़ी घात `2^2` है।
`3` की सबसे बड़ी घात `3^1` है।
`5` की सबसे बड़ी घात `5^1` है।
अतः, `LCM(6, 20) = 2^2 × 3 × 5 = 4 × 3 × 5 = 60`
HCF × LCM = दो संख्याओं का गुणनफल (Product of two numbers)
यह एक बहुत महत्वपूर्ण संबंध है जो केवल दो धनात्मक पूर्णांकों के लिए लागू होता है।
`HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b`
उपरोक्त उदाहरण में, `HCF(6, 20) = 2` और `LCM(6, 20) = 60`।
`HCF × LCM = 2 × 60 = 120`
`a × b = 6 × 20 = 120`
यह संबंध सत्यापित होता है।
प्रश्नावली 1.2 के महत्वपूर्ण प्रश्न:
उदाहरण हल (प्रश्न 2 (i)): 26 और 91 का HCF और LCM ज्ञात करें और संबंध की जाँच करें।
`26 = 2 × 13`
`91 = 7 × 13`
`HCF(26, 91) = 13`
`LCM(26, 91) = 2^1 × 7^1 × 13^1 = 2 × 7 × 13 = 182`
`HCF × LCM = 13 × 182 = 2366`
`दो संख्याओं का गुणनफल = 26 × 91 = 2366`
चूंकि `2366 = 2366`, संबंध सत्यापित होता है।
यह section बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और इससे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। RBSE Notes में आपको ऐसे कई उदाहरण और अभ्यास प्रश्न मिलेंगे।
| विशेषता | HCF (महत्तम समापवर्तक) | LCM (लघुत्तम समापवर्त्य) |
|---|---|---|
| **परिभाषा** | दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा उभयनिष्ठ भाजक। | दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज। |
| **ज्ञात करने की विधि** | यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथम या अभाज्य गुणनखंड विधि। | अभाज्य गुणनखंड विधि। |
| **अभाज्य गुणनखंड से** | उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल। | सभी अभाज्य गुणनखंडों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल। |
| **उदाहरण (6, 20)** | `HCF(6, 20) = 2` | `LCM(6, 20) = 60` |
| **संबंध (दो संख्याओं के लिए)** | `HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b` | `HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b` |
अपरिमेय संख्याओं का पुनर्भ्रमण (Revisiting Irrational Numbers)
कक्षा 9 में आपने अपरिमेय संख्याओं की परिभाषा पढ़ी थी कि वे संख्याएँ जिन्हें `p/q` के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता, जहाँ `p` और `q` पूर्णांक हैं और `q ≠ 0`। आपने यह भी देखा था कि `√2`, `√3`, `√5`, `π` आदि अपरिमेय संख्याएँ हैं। कक्षा 10 में, हम इन अपरिमेय संख्याओं को सिद्ध करना सीखेंगे। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण proof है जो अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है।
√2, √3, √5 आदि को अपरिमेय सिद्ध करना (Proving √2, √3, √5 etc. as Irrational)
हम विरोधाभास द्वारा प्रमाण (Proof by Contradiction) विधि का उपयोग करके इन संख्याओं को अपरिमेय सिद्ध करते हैं।
उदाहरण: सिद्ध कीजिए कि `√2` एक अपरिमेय संख्या है।
यदि `√2` एक परिमेय संख्या है, तो इसे `a/b` के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ `a` और `b` सह-अभाज्य पूर्णांक (co-prime integers) हैं और `b ≠ 0`। (सह-अभाज्य का अर्थ है कि `a` और `b` में 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है।)
`√2 = a/b`
`2 = a^2 / b^2`
`2b^2 = a^2` ...(समीकरण 1)
अतः, `a` भी 2 से विभाज्य होगा। (यह एक प्रमेय है: यदि `p` एक अभाज्य संख्या है और `p` `a^2` को विभाजित करता है, तो `p`, `a` को भी विभाजित करेगा।)
चूंकि `a`, 2 से विभाज्य है, हम `a = 2c` लिख सकते हैं, जहाँ `c` कोई पूर्णांक है।
`2b^2 = (2c)^2`
`2b^2 = 4c^2`
`b^2 = 2c^2`
अतः, `b` भी 2 से विभाज्य होगा।
लेकिन, हमने शुरुआत में माना था कि `a` और `b` सह-अभाज्य हैं (यानी, उनका 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है)।
यह एक विरोधाभास है।
अतः, `√2` एक अपरिमेय संख्या है।
यह proof बहुत महत्वपूर्ण है और इसे अच्छी तरह से समझना चाहिए। इसी तरह `√3` और `√5` को भी अपरिमेय सिद्ध किया जा सकता है।
प्रश्नावली 1.3 के महत्वपूर्ण प्रश्न:
इन proofs का अभ्यास करना बहुत ज़रूरी है। यदि आपको किसी भी चरण में संदेह होता है, तो TopperApp पर Nidhi AI doubt solver आपकी मदद कर सकता है।
परिमेय संख्याओं और उनके दशमलव प्रसारों का पुनर्भ्रमण (Revisiting Rational Numbers and their Decimal Expansions)
कक्षा 9 में आपने सीखा था कि परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार या तो सांत (terminating) होते हैं या असांत आवर्ती (non-terminating repeating) होते हैं। इस अध्याय में, हम बिना वास्तविक भाग किए (without actual division) यह निर्धारित करना सीखेंगे कि किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार सांत होगा या असांत आवर्ती।
सांत और असांत आवर्ती दशमलव प्रसार (Terminating and Non-terminating Repeating Decimal Expansions)
प्रमेय: यदि `x` एक परिमेय संख्या है जिसका दशमलव प्रसार सांत है, तो `x` को `p/q` के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ `p` और `q` सह-अभाज्य हैं, और `q` का अभाज्य गुणनखंडन `2^n 5^m` के रूप का है, जहाँ `n` और `m` ऋणेतर पूर्णांक (non-negative integers) हैं।
प्रमेय का विलोम: यदि `x = p/q` एक परिमेय संख्या है, जहाँ `p` और `q` सह-अभाज्य हैं, और `q` का अभाज्य गुणनखंडन `2^n 5^m` के रूप का है, जहाँ `n` और `m` ऋणेतर पूर्णांक हैं, तो `x` का दशमलव प्रसार सांत होगा।
प्रमेय 1.7 (असांत आवर्ती के लिए): यदि `x = p/q` एक परिमेय संख्या है, जहाँ `p` और `q` सह-अभाज्य हैं, और `q` का अभाज्य गुणनखंडन `2^n 5^m` के रूप का नहीं है, जहाँ `n` और `m` ऋणेतर पूर्णांक हैं, तो `x` का दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होगा।
सरल शब्दों में:
उदाहरण:
प्रश्नावली 1.4 के महत्वपूर्ण प्रश्न:
उदाहरण हल (प्रश्न 1 (i)): `13/3125`
`3125 = 5 × 625 = 5 × 5 × 125 = 5 × 5 × 5 × 25 = 5 × 5 × 5 × 5 × 5 = 5^5`
उदाहरण हल (प्रश्न 1 (iii)): `64/455`
`455 = 5 × 91 = 5 × 7 × 13`
`17/8 = 17 / 2^3`
हर को `10` की घात में बदलने के लिए, हमें `5^3` से गुणा करना होगा।
`= (17 × 5^3) / (2^3 × 5^3)`
`= (17 × 125) / (10^3)`
`= 2125 / 1000 = 2.125`
यह section छात्रों को बिना लंबी गणना के संख्याओं के गुणों को समझने में मदद करता है। राजस्थान बोर्ड की परीक्षाओं में ऐसे प्रश्न अक्सर एक या दो अंक के लिए पूछे जाते हैं।
राजस्थान बोर्ड के छात्रों के लिए विशेष टिप्स (Special Tips for Rajasthan Board Students)
राजस्थान बोर्ड (RBSE) के छात्रों के लिए कक्षा 10 गणित की तैयारी में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
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कक्षा 10 गणित के अध्याय 1 "वास्तविक संख्याएँ" को पूरी तरह से समझने और उसमें महारत हासिल करने के लिए TopperApp आपका सबसे अच्छा साथी है।
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